क्या आप जानते है?
क्या होते है १६ संस्कार?
इनकी आवश्यकता क्यों होती है?
हमारे हिन्दू धर्म में, सनातन परंपरा में १६ संस्कार से ही निर्मित होती है हमारी संस्कृति। इसीलिए, हमारी संस्कृति को सनातन कहा जाता है।
जो बहुत पुरानी सनातन काल से, अनादिकाल से चली आ रही है।
हिन्दू धर्म भारत का सर्वप्रमुख धर्म है। जिसमे पवित्र १६ संस्कार संपन्न किए जाते है। हिन्दू धर्म की प्राचीनता और विशालता के कारण ही उसे सनातन धर्म भी कहा जाता है।
हिन्दू धर्म किसी भी व्यक्ति विशेष द्वारा स्थापित किया गया धर्म नहीं है, बल्कि, प्राचीन काल से ही, चले आ रहे धर्मो और आस्थाओं का बड़ा सामुच्य है।
संस्कार का सामान्य अर्थ किसीको सुसंस्कृत करना या शुद्ध करके उस व्यक्ति को उपयुक्त बनाना। विशेष विधियां और क्रियाओं से उत्तम बनाना ही संस्कार कहा जाता है।
किसी साधारण मनुष्य को विशेष प्रकार की धार्मिक क्रिया/प्रक्रियाओं द्वारा बनाना ही सुसंस्कृत कहा जाता है।
संस्कार, संस्कृत भाषा का ही शब्द है। मन, वचन, कर्म, शरीर को पवित्र करना ही सही मायने में संस्कार कहा जाता है और संस्कार से ही हमारा सामाजिक एवं आध्यात्मिक जीवन पुष्ट होता है।
व्यक्तित्व निर्माण में हिन्दू संस्कारो की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। संस्कार विरुद्ध आचरण करना, असभ्यता की निशानी है। संस्कार मनुष्यो को पाप और अज्ञान से दूर रखकर आचार, विचार, ज्ञान, विज्ञान से सयुंक्त करते है।
खास करके तीन भागों में विभाजित संस्कारों को क्रमबद्ध १६ संस्कारों में विभाजित किया जा सकता है, जो ३ प्रकार के होते है ।
१) मलापनयन २) अतिशायाधान ३) न्युनांगपुरक
इन तीनों प्रकारों को जोड़कर एकसाथ १६ संस्कार बनाए गए है। जिसका हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है। पर आज कल के इस भागदौड़ वाली जिंदगी में व्यस्त लोगो को शायद इसका ज्ञान नहीं रहा। वेद, स्मृति और पुराणों में अनेक संस्कार बताए गए है। परन्तु, महिर्षी वेदव्यास के अनुसार, उनमें से १६ संस्कारो में ही सारे संस्कार सिमट जाते है।
मनुष्य जन्म से लेकर मृत्यु तक यह पवित्र १६ संस्कार संपन्न किए जाते है।
जो बहुत पुरानी सनातन काल से, अनादिकाल से चली आ रही है।
हिन्दू धर्म भारत का सर्वप्रमुख धर्म है। जिसमे पवित्र १६ संस्कार संपन्न किए जाते है। हिन्दू धर्म की प्राचीनता और विशालता के कारण ही उसे सनातन धर्म भी कहा जाता है।
हिन्दू धर्म किसी भी व्यक्ति विशेष द्वारा स्थापित किया गया धर्म नहीं है, बल्कि, प्राचीन काल से ही, चले आ रहे धर्मो और आस्थाओं का बड़ा सामुच्य है।
संस्कार का सामान्य अर्थ किसीको सुसंस्कृत करना या शुद्ध करके उस व्यक्ति को उपयुक्त बनाना। विशेष विधियां और क्रियाओं से उत्तम बनाना ही संस्कार कहा जाता है।
किसी साधारण मनुष्य को विशेष प्रकार की धार्मिक क्रिया/प्रक्रियाओं द्वारा बनाना ही सुसंस्कृत कहा जाता है।
संस्कार, संस्कृत भाषा का ही शब्द है। मन, वचन, कर्म, शरीर को पवित्र करना ही सही मायने में संस्कार कहा जाता है और संस्कार से ही हमारा सामाजिक एवं आध्यात्मिक जीवन पुष्ट होता है।
व्यक्तित्व निर्माण में हिन्दू संस्कारो की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। संस्कार विरुद्ध आचरण करना, असभ्यता की निशानी है। संस्कार मनुष्यो को पाप और अज्ञान से दूर रखकर आचार, विचार, ज्ञान, विज्ञान से सयुंक्त करते है।
खास करके तीन भागों में विभाजित संस्कारों को क्रमबद्ध १६ संस्कारों में विभाजित किया जा सकता है, जो ३ प्रकार के होते है ।
१) मलापनयन २) अतिशायाधान ३) न्युनांगपुरक
इन तीनों प्रकारों को जोड़कर एकसाथ १६ संस्कार बनाए गए है। जिसका हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है। पर आज कल के इस भागदौड़ वाली जिंदगी में व्यस्त लोगो को शायद इसका ज्ञान नहीं रहा। वेद, स्मृति और पुराणों में अनेक संस्कार बताए गए है। परन्तु, महिर्षी वेदव्यास के अनुसार, उनमें से १६ संस्कारो में ही सारे संस्कार सिमट जाते है।
मनुष्य जन्म से लेकर मृत्यु तक यह पवित्र १६ संस्कार संपन्न किए जाते है।
क्रमबद्ध १६ संस्कार
१) गर्भाधान संस्कार
२) पुंसवन संस्कार
३) सीमंतोन्नयन संस्कार
४) जातकर्म संस्कार
५) नामकरण संस्कार
६) निष्क्रमण संस्कार
७) अन्नप्राशन संस्कार
८) चूड़ाकरण संस्कार
९) कर्णवेध संस्कार
१०) विद्यारंभ संस्कार
११) उपनयन संस्कार
१२) वेदारंभ संस्कार
१३) केशांत संस्कार
१४) समावरतन संस्कार
१५) विवाह संस्कार
१६) अंत्येष्ठि संस्कार
यह १६ संस्कार धार्मिक क्रियाओं से संपन्न किए जाते है, जो किसी व्यक्ति को अपने समुदाय का योग्य सदस्य बना करके उसके शरीर, मन और मस्तिष्क को पवित्र करते है।
संस्कार ही मनुष्यो को सभ्यता का हिस्सा बनाएं रखता है।
तो मित्रो, यह थे हमारे हिन्दू धर्म के मुख्य १६ संस्कार।
अगर यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो तो इसे अपने मित्रो के बीच शेयर करना ना भूले।
पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद।
आपका दिन शुभ और शांतिमय हो।
Thanks for finally writing about >"क्या होते है १६ संस्कार?" <Liked it!
ReplyDeleteThank for your feedback
Delete