Do You Know? क्या आप जानते है?
Do You Know?
क्या आप जानते है?
एक पुरानी सूफ़ी कहावत है,
जिंदगी तुम्हारे उसी गुण का इम्तिहान लेती है,
जो तुम्हारे भीतर मौजूद है।
ये जो हम सब अपनी अपनी ज़िंदगी जीते है, सच मे कैसी भी हो, हम भाग्यशाली तो जरूर है। इस लिए हमें अपनी ज़िंदगी हसते खेलते, और सदा मुस्कुराते, खुश होकर बितानी चाहिए। जानता हूँ की कहना आसान है पर हकीकत कुछ और होती है।
जीवन मे उतार चढ़ाव तो आते ही रहते है।
जीवन मे उतार चढ़ाव तो आते ही रहते है।
लेकिन आप यह बात भी मानते होंगें की अगर हम अपना जीवन दुःखी मन से या परेशान रहकर व्यतीत करते है तो हमे यह ज़िंदगी जीने में बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
और अगर हम सकारात्मक सोच और ऊर्जा से अपनी ज़िंदगी जीते है तो हमें तब सही मायने मे भाग्यशाली होने की अनुभूति होती है।
इसलिए हमें ये जानना जरूरी हो जाता है कि हम अपनी ज़िंदगी खुश रहकर प्रसन्नता से कैसे व्यतीत कर सके!
आज इसी विषय पर कुछ रोचक बातें आपके सामने रखने की एक छोटी सी कोशिश कर रहा हूँ। उम्मीद है कि आपको पसंद आये।
“चार लोग क्या कहेंगे? चार दिन की ज़िंदगी, चार महत्वपूर्ण बातें जाने बिना ही खत्म कर देते है और अंत मे वही चार लोग अपने कंधों पर रखकर अंतिम संस्कार कर आते है।”
खैर, ये तो व्यंग था।
लेकिन मैं आपको चार बाते कहने जा रहा हु।
मुझे पता है, मुझे पता है
मुझे पता है, मुझे नहीं पता
मुझे नहीं पता, मुझे पता है
मुझे नहीं पता, मुझे नहीं पता
१) मुझे पता है, मुझे पता है
जी, कहने का मतलब ये है कि, हमे क्या पता है, ये हमे पता होता है, जैसे कि अगर हम डॉक्टर है तो हमे पता है कि किसी मरीज को कैसे ट्रीटमेंट देनी है। अगर हम गायक है तो कैसे कोई गीत गाना है। और अगर हम संगीतकार है तो हम हमारे हुंनर से प्यारा सा संगीत पेश कर सकते है। मतलब, यह पहली बात से मै ये कहने की कोशिश कर रहा हु की हमे अपने हुंनर की पहचान होती है, हम किस बात मे या किस विषय मे माहीर है ये अगर हमे पता हो तो हम अपनी ज़िंदगी कई सफलता प्राप्त कर, अच्छी तरह से व्यतीत कर सकते है। जिन्हें यह बात का ज्ञान है ऐसे लोग बहुत कम होते है।
२) मुझे पता है, मुझे नहीं पता
अब आप स्वयं ही अंदाजा लगा सकते हो कि अगर हमे यह बात पता है कि हमे क्या नहीं पता है। देखा जाए तो यह भी अच्छी बात है कि हमे क्या नहीं पता और यह बहुत बड़ी बात है। क्योंकि हम जानते है तो हम उस बात का पता लगा सके, या जान सके और ज़िंदगी मे आगे बढ़ सके।
उदाहरण के रूप में,
अगर आप को व्हीकल चलाना, तैरना, संगीत बनाना, इत्यादि नहीं आता तो आप इसे सिख कर आगे बढ़ सकते है, क्योंकि हमें यह बात का ज्ञान है कि हमे क्या नही पता। अगर आपको अंग्रेजी भाषा का ज्ञान नही है या कम ज्ञान है तो यह बात आप जानते ही हो, बस, आप अंग्रेजी भाषा का ज्ञान ले कर आगे बढ़ सकते हो।
३) मुझे नहीं पता, मुझे पता है
हमे जब पता है कि हमे किसी जरूरी बात का या जरूरी विषय का ज्ञान है तो यह बहुत अच्छी बात है, यह भी अच्छी बात है कि हमे किस विषय का ज्ञान नहीं है। पर अब शुरू होता है ज़िंदगी का सही खेल।
ज्यादातर लोगों को यह ही पता नही होता कि वह किस विषय मे माहिर है। किसी बात में या किसी विषय मे माहिर तो होते है पर इस बात का ज्ञान नहीं होता। और ऐसे विषय मे तब ही हमे ज्ञान होता है जब वह बात या विषय हमारे सामने आता है।
जैसे कि अगर आप अखबार पढ़ रहे हो या टेलीविजन पर समाचार देख रहे हो कि मैराथन दौड़ मे किसीने नया रिकॉर्ड बनाया, या फिर किसी लेखक या कवि को अपनी रचनात्मक कृतियों पर अवॉर्ड मिला, किसी ने यूट्यूब पर अच्छी अच्छी वीडियो बनाकर शोहरत हासिल की, तो कोई ड्रामा में अच्छी अदाकरी कर रहा है...इत्यादि। और तब ही आपको पता चलता है की हा, यह तो मैं भी कर सकता हूँ। तब जाकर हमे अपने अंदर छूपे हुंनर को बाहर ला सकते है। और अपनी ज़िंदगी को बेहतर बना सकते है।
४) मुझे नहीं पता, मुझे नहीं पता
और आखिर मे सबसे मुश्किल बात आती है।
हमे यही पता नही होता कि हमे क्या नही पता?
मेरी राय मे विश्व मे सबसे अधिक लोगों की यही परेशानी होती है। जब हमे कुछ विषय का ज्ञान है या नहीं और इस बात की हमे जानकारी हो, तब तक कोई दिक्कत नहीं होती। पर जब हमे कुछ खास विषय का कोई ज्ञान ही न हो और ऊपर से हमे खुद भी नही पता होता तब ऐसे में ज़िंदगी काफी मुश्किल हो जाती है।
अपने अंदर छिपे हुंनर को पहचान ही नही पाते। और अपने मन मर्जी के हिसाब से बिना कोई लक्ष्य तय किये बस ज़िंदगी बिता देते है।
जैसे बिना कोई लक्ष्य के जीना।
ज़िंदगी मे सफल होने हेतु कैसे कोई लक्ष्य बनाना है? कैसे कोई लक्ष्य को हासिल करना है? उसके लिए क्या क्या आयोजन करना चाहिए? यह सब बातें ही ज्यादातर लोगों को पता नहीं होती।
उदाहरण स्वरूप, अगर कोई अपनी नई नई नौकरी शुरू करता है तो वह अपने हिसाब से कर तो लेता है पर कुछ वक़्त बीत जाने पर ही उसे अनुभव होता है।
शुरू मे किसी काम को तय सीमा पर पूरा करना हो तो दिक़्क़तों के साथ पूरा होता है या नही भी होता, पर कुछ समय बीत जाने के बाद अपने अनुभव अनुसार वही कार्य काफी सरल तरीके से समय से पहले कर लेते है। और जब कोई अपने से ऊपरी अधिकारी सिखाते हैं तब वही काम, बहुत जल्दी, बिना ज्यादा वक़्त गवाएं तय सीमा पर अच्छे से हो जाता है।
अपने अपने जीवन के अनुभव से ही हमे कभी कभी पता चलता है कि हमे क्या पता नहीं था जो वक़्त बीत जाने पर भी पता नही चल पाया।
मेरे हिसाब से अगर हमें अपने अंदर छिपे हुए हुंनर को बाहर लाना है तो हर वक़्त अपने अवचेतन मन को सजाग रखना पड़ेगा, हमेशां सफ़ल लोगो और सकारात्मक सोच वालों के संपर्क मे रहना चाहिए।
फुर्सत के वक़्त मे नई नई जानकारी प्राप्त करते रहना चाहिए। रचनात्मक कार्यों की और ज्यादा ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सकारात्मक अभिगम वाली पुस्तकें पढ़ते रहना चाहिए।
क्योंकि हमें यही मालुम नही होता है कि हमे किस बात का या किस विषय का ज्ञान है भी या नहीं।
अगर हम सफलता की और आगे बढ़ने से पहले ही हार मान लेते है तो जिंदगी फिर अपने खेल खेलना शुरू कर देती है।
और ऊपर शुरू मे दी गई सूफी कहावत अनुसार ज़िंदगी अपने अनुसार अपने अंदर छिपे हुए गुणों के इम्तिहान लेना शुरू कर देती है।
ज़िंदगी मे पछतावा करना छोड़ दीजिए। ज़िंदगी बदलने के लिए मौजूदा हालातों से लड़ना पड़ता है और ज़िंदगी को आसान करने के लिए अपने मन को समझना पड़ता है।
ज़िंदगी हमें हमेशा एक नया मौका देती है, सरल शब्दों मे उसे "इसी पल" कहते है।
क्योंकि, कोई भी इंसान अगर दिल का सच्चा हो, ईमानदार हो, खुद पर भरोसा करता हो, तो वह अपनी जिंदगी नए सिरे से, फिर से, दोबारा कही से भी, कैसे भी शुरू कर सकता है।
एक छोटी सी मेरी कोशिश में अगर आपके कोई सुज़ाव हो तो कॉमेंट जरूर करें।
पूरा पढ़ने की लिए धन्यवाद।
अब आप स्वयं ही अंदाजा लगा सकते हो कि अगर हमे यह बात पता है कि हमे क्या नहीं पता है। देखा जाए तो यह भी अच्छी बात है कि हमे क्या नहीं पता और यह बहुत बड़ी बात है। क्योंकि हम जानते है तो हम उस बात का पता लगा सके, या जान सके और ज़िंदगी मे आगे बढ़ सके।
उदाहरण के रूप में,
अगर आप को व्हीकल चलाना, तैरना, संगीत बनाना, इत्यादि नहीं आता तो आप इसे सिख कर आगे बढ़ सकते है, क्योंकि हमें यह बात का ज्ञान है कि हमे क्या नही पता। अगर आपको अंग्रेजी भाषा का ज्ञान नही है या कम ज्ञान है तो यह बात आप जानते ही हो, बस, आप अंग्रेजी भाषा का ज्ञान ले कर आगे बढ़ सकते हो।
३) मुझे नहीं पता, मुझे पता है
हमे जब पता है कि हमे किसी जरूरी बात का या जरूरी विषय का ज्ञान है तो यह बहुत अच्छी बात है, यह भी अच्छी बात है कि हमे किस विषय का ज्ञान नहीं है। पर अब शुरू होता है ज़िंदगी का सही खेल।
ज्यादातर लोगों को यह ही पता नही होता कि वह किस विषय मे माहिर है। किसी बात में या किसी विषय मे माहिर तो होते है पर इस बात का ज्ञान नहीं होता। और ऐसे विषय मे तब ही हमे ज्ञान होता है जब वह बात या विषय हमारे सामने आता है।
जैसे कि अगर आप अखबार पढ़ रहे हो या टेलीविजन पर समाचार देख रहे हो कि मैराथन दौड़ मे किसीने नया रिकॉर्ड बनाया, या फिर किसी लेखक या कवि को अपनी रचनात्मक कृतियों पर अवॉर्ड मिला, किसी ने यूट्यूब पर अच्छी अच्छी वीडियो बनाकर शोहरत हासिल की, तो कोई ड्रामा में अच्छी अदाकरी कर रहा है...इत्यादि। और तब ही आपको पता चलता है की हा, यह तो मैं भी कर सकता हूँ। तब जाकर हमे अपने अंदर छूपे हुंनर को बाहर ला सकते है। और अपनी ज़िंदगी को बेहतर बना सकते है।
४) मुझे नहीं पता, मुझे नहीं पता
और आखिर मे सबसे मुश्किल बात आती है।
हमे यही पता नही होता कि हमे क्या नही पता?
मेरी राय मे विश्व मे सबसे अधिक लोगों की यही परेशानी होती है। जब हमे कुछ विषय का ज्ञान है या नहीं और इस बात की हमे जानकारी हो, तब तक कोई दिक्कत नहीं होती। पर जब हमे कुछ खास विषय का कोई ज्ञान ही न हो और ऊपर से हमे खुद भी नही पता होता तब ऐसे में ज़िंदगी काफी मुश्किल हो जाती है।
अपने अंदर छिपे हुंनर को पहचान ही नही पाते। और अपने मन मर्जी के हिसाब से बिना कोई लक्ष्य तय किये बस ज़िंदगी बिता देते है।
ज़िंदगी मे सफल होने हेतु कैसे कोई लक्ष्य बनाना है? कैसे कोई लक्ष्य को हासिल करना है? उसके लिए क्या क्या आयोजन करना चाहिए? यह सब बातें ही ज्यादातर लोगों को पता नहीं होती।
उदाहरण स्वरूप, अगर कोई अपनी नई नई नौकरी शुरू करता है तो वह अपने हिसाब से कर तो लेता है पर कुछ वक़्त बीत जाने पर ही उसे अनुभव होता है।
शुरू मे किसी काम को तय सीमा पर पूरा करना हो तो दिक़्क़तों के साथ पूरा होता है या नही भी होता, पर कुछ समय बीत जाने के बाद अपने अनुभव अनुसार वही कार्य काफी सरल तरीके से समय से पहले कर लेते है। और जब कोई अपने से ऊपरी अधिकारी सिखाते हैं तब वही काम, बहुत जल्दी, बिना ज्यादा वक़्त गवाएं तय सीमा पर अच्छे से हो जाता है।
अपने अपने जीवन के अनुभव से ही हमे कभी कभी पता चलता है कि हमे क्या पता नहीं था जो वक़्त बीत जाने पर भी पता नही चल पाया।
मेरे हिसाब से अगर हमें अपने अंदर छिपे हुए हुंनर को बाहर लाना है तो हर वक़्त अपने अवचेतन मन को सजाग रखना पड़ेगा, हमेशां सफ़ल लोगो और सकारात्मक सोच वालों के संपर्क मे रहना चाहिए।
फुर्सत के वक़्त मे नई नई जानकारी प्राप्त करते रहना चाहिए। रचनात्मक कार्यों की और ज्यादा ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सकारात्मक अभिगम वाली पुस्तकें पढ़ते रहना चाहिए।
क्योंकि हमें यही मालुम नही होता है कि हमे किस बात का या किस विषय का ज्ञान है भी या नहीं।
अगर हम सफलता की और आगे बढ़ने से पहले ही हार मान लेते है तो जिंदगी फिर अपने खेल खेलना शुरू कर देती है।
और ऊपर शुरू मे दी गई सूफी कहावत अनुसार ज़िंदगी अपने अनुसार अपने अंदर छिपे हुए गुणों के इम्तिहान लेना शुरू कर देती है।
ज़िंदगी मे पछतावा करना छोड़ दीजिए। ज़िंदगी बदलने के लिए मौजूदा हालातों से लड़ना पड़ता है और ज़िंदगी को आसान करने के लिए अपने मन को समझना पड़ता है।
ज़िंदगी हमें हमेशा एक नया मौका देती है, सरल शब्दों मे उसे "इसी पल" कहते है।
क्योंकि, कोई भी इंसान अगर दिल का सच्चा हो, ईमानदार हो, खुद पर भरोसा करता हो, तो वह अपनी जिंदगी नए सिरे से, फिर से, दोबारा कही से भी, कैसे भी शुरू कर सकता है।
समाप्त।
एक छोटी सी मेरी कोशिश में अगर आपके कोई सुज़ाव हो तो कॉमेंट जरूर करें।
पूरा पढ़ने की लिए धन्यवाद।
- R. Parekh
It's good to read..very much knowledgeable reading...life is is full of surprises and in every single moment we cn learn lot if we see our inner being.. And thank u so much fr writing it in hindi language..all over its good to read.👌👌
ReplyDeleteThank you so much for your valuable feedback...
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