Consistency And Persistentcy

(Image Credit: c-George, iStock)

नमस्कार मित्रो,

आज के इस ब्लॉग में मैने Consistency और Persistentcy के विषय पर आप सभी को बेहद जरूरी और उपयोगी जानकारी देने का प्रयास किया है।

Consistency और Persistentcy की कमी हमारी जिंदगी पर पूरी तरह से असर करती रहती है।

हमारी जिंदगी में विकास के विभिन्न चरण होते है। जिसमे Consistency और Persistency बहुत ही जरूरी होता है।

वैसे, जीवन के प्रत्येक चरण में "धैर्य," "कड़ी मेहनत," "अनुशासन," और "लचीलापन" होना भी जरूरी है। जिसमे Consistency और Persistency भी जुड़ जाएं, तो मानो, आकाश अंधेरे से सुनहरी धूप में बदल जाता है, जो समय के साथ दृढ़ता के पुरस्कार का प्रतीक है।

Consistency और Persistentcy की जरूरत हमे हर क्षेत्र में पड़ती है, जहां लंबे समय तक लागातार प्रयास करने से सफलता मिलती है।

ये दोनो आदतें हमारी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है। इसे कुछ उदाहरण से समझ ने से पहले Consistency और Persistentcy के बीच का अंतर क्या है? वह समझते हैं।

कंसिस्टेंसीनियमित रूप से काम करते रहना, भले ही वह काम छोटा क्यूं न हो (हर दिन १% बेहतर बनना)

पर्सिस्टेंसीजब मुश्किलों भरी चुनौतियां आए तब भी हार न मानते हुए डटे रहना।

करियर और स्किल डेवलपमेंट के लिए नए स्किल्स सीखने में और उसमे एक्सपर्ट बनने के लिए लगातार अभ्यास (Consistency) और हार न मानने का जज़्बा (Persistency) जरूरी है।
इसे कुछ उदाहरण से समझ सकते है।

प्रोफेशनल ग्रोथ में:
करियर में आगे बढ़ने के लिए लगातार सीखते रहना और इस दौरान आने वाली चुनौतियों के बावजूद लगे रहना जरूरी है।

पर्सनल ग्रोथ और सेल्फ – इंप्रूवमेंट:
* नई आदतें बनाने में:
अगर आप सुबह जल्दी उठना, व्यायाम, या ध्यान, योग जैसी अच्छी आदतें बनाना चाहते है, तो आपको नियमितता बनाए रखनी होगी।

* इंट्यूशन और छठ्ठी इंद्रियां डेवलप करने में:
जब हम अपनी तीसरी आंख खोलने में या अवेयरनेस बढ़ाने की और प्रयास कर रहे होते है, तो हमें रोज़ प्रयास करते रहना चाहिए। 

* डिसिप्लिन और सेल्फ कंट्रोल:
कोई भी अच्छी आदत एक दिन में नही बनती, उसे बार-बार करने से ही हमारी जिंदगी में बदलाव आता है।

* सफलता और लक्ष्य हासिल करने में:
अगर हम कोई व्यापार कर रहे है, तो हर दिन थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ना और असफलताओं के बावजूद प्रयास करते रहना जरूरी है। 

* लंबे अंतराल के लक्ष्य को हासिल करने में:
चाहे वह किसी प्रतियोगी की परीक्षा की तैयारी हो, या अपने शरीर का वजन उतारने की कोशिश हो, या कोई बड़ा सपना पूरा करना हो, Consistency और Persistency के बिना कुछ भी संभव नहीं है।

*रिश्तों और सामाजिक जिंदगी में:
रिश्तों को मजबूत करने में, दोस्ती, परिवार और पार्टनर के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए, नियमित रूप से समय और प्रयास देना पड़ता है।

* कम्युनिकेशन स्किल्स सुधारने में:
लगातार प्रयास से हम दूसरो से बेहतर तरीके से बातचीत करना सीख सकते है।

Consistent और Persistent में मुख्य अंतर उनके अर्थ और उपयोग के आधार पर है।

दोनों शब्द दृढ़ता और निरंतरता को दर्शाते हैं, लेकिन उनके अर्थ में क्या अंतर है, यह कुछ उदाहरण से समझते है।

1. Consistent (संगत, निरंतर, स्थिर):
जब कोई व्यक्ति या चीज़ एक समान तरीके से लगातार काम करती रहती है, बिना बदलाव या उतार-चढ़ाव के...
मतलब की... संगत, निरंतर, स्थिर, एकरूपता बनाए रखने वाला।
उदाहरण: यदि आप रोज़ एक्सरसाइज करते हैं, तो आप एक consistent व्यक्ति हैं।

2. Persistent (दृढ़, अडिग, हठी):
जब कोई व्यक्ति कठिनाइयों के बावजूद अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार प्रयास करता रहता है और हार नहीं मानता।
मतलब की... दृढ़, अडिग, हठी, लगे रहने वाला।
उदाहरण: यदि कोई छात्र कई बार फेल होने के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखता है, तो वह Persistent है।

* खास और महत्वपूर्ण अंतर:
Consistent का मतलब है एक समान स्तर बनाए रखना। और, Persistent का मतलब है कठिनाइयों के बावजूद लगे रहना।

अगर सफलता चाहिए, तो Consistent रहना ज़रूरी है, और अगर बाधाओं को पार करना है, तो Persistent होना ज़रूरी है! 

...हमने अब तक इन दोनो शब्दों को तो समझ लिया है, अब जानते है की इन दोनों को साथ में कैसे इस्तेमाल करें?

अगर आप Consistent और Persistent दोनों हैं, तो सफलता पाना आसान हो जाता है। यदि आप रोज़ बिना रुके मेहनत करते हैं (Consistent) और कठिनाइयों के बावजूद हार नहीं मानते (Persistent), तो आप किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। 

▪️Consistent और Persistent कैसे बनें?
सबसे पहले, अपने "क्यूं" (WHY) को क्लियर करें अगर किसी चीज़ में लगातार बने रहना मुश्किल हो रहा है,
तो खुद से पूछें: -
"मैं यह क्यूं करना चाहता हूँ?", 
"अगर मैं इसे पूरा नहीं कर पाया, तो मुझे क्या खोना पड़ेगा?", "अगर मैं इसे पूरा कर लूँ, तो मेरी लाइफ कैसे बदल जाएगी?"

जब (WHY) स्ट्रॉन्ग होता है, तो (HOW) अपने आप आसान हो जाता है।

▪️छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं (Micro Goals):
Consistency टूटती है, क्योंकि हम बहुत बड़े टारगेट सेट कर लेते हैं। हर दिन छोटे-छोटे टास्क पूरे करें, जो आसान लगें। जैसे की, "हर दिन सिर्फ 10 मिनट पढ़ूंगा" या "हर दिन 5 मिनट एक्सरसाइज़ करूँगा।" छोटी छोटी जीत (Small Wins) आपकी आदत बनाते हैं!

▪️एक FIXED TIME पर काम करें:
जब भी आप कुछ नया सीख रहे हों या कोई नई आदत डाल रहे हों, तब, हर दिन एक फिक्स टाइम सेट करें। यह एक तरह से आपके दिमाग को सिग्नल देता है कि "अब इस समय मुझे यही करना है!" शुरू में जबरदस्ती करनी पड़ेगी, लेकिन 21 दिन बाद यह आदत बन जाएगी।

(21 दिन ही क्यू? इसके लिए अलग से और विस्तार से दूसरे ब्लॉग में समझाऊंगा। अगर आप वाकई में 21 दिन का रुल समझना चाहते है तो कॉमेंट में लिख सकते हैं।)

▪️जब मन ना करे, तब भी 5 मिनट के लिए करें:
क्यूंकि, कई बार हमें कुछ करने का मन नहीं करता। उस समय खुद से कहें, "मैं बस 5 मिनट के लिए यह काम करूँगा।"

90% मामलों में जब आप 5 मिनट शुरू करेंगे, तो फिर अपने आप करते रहेंगे!

▪️Consistency का सबसे बड़ा राज: "शुरुआत करना।"

▪️खुद को Accountable रखें: 
हर 3-4 दिन बाद, खुद से पूछें, "मैंने कितनी बार अपना टारगेट पूरा किया?" अपने प्रोग्रेस को लिखें या ट्रैक करें।

▪️सबसे जरूरी बात:
Consistency एक स्किल है, Talent नहीं। आप जितना छोटे-छोटे कदम उठाते रहेंगे, उतना मजबूत बनते जाएंगे। हर दिन थोड़ा-थोड़ा करना। और हो सके तो कभी-कभी ज्यादा भी करना।

▪️समापन:
अगर आपको लगता है की आज इस ब्लॉग में Consistency और Persistency के विषय में कुछ नया जानने को मिला, या इस संदर्भ में आप अपनी और से इस विषय पर कुछ जोड़ना चाहते हैं तो कॉमेंट बॉक्स में बता सकते हैं।

पूरा ब्लॉग पढ़ने के लिए धन्यवाद।

आपके... हर दिन... सफलता भरे सिद्ध हो।




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